30 अक्टूबर 2026 | Riddhi Siddhi Share Brokers | IPO & Investor Education
सितंबर 2026 में भारतीय शेयर बाजार में एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिली।
एक तरफ Nifty 50 में 6.1% की गिरावट दर्ज हुई, वहीं दूसरी तरफ भारतीय बाजार में 70 IPO की Listing हुई—जो SEBI की अक्टूबर 2026 Bulletin के अनुसार एक महीने में IPO listings की रिकॉर्ड संख्या थी।
इनमें 32 Mainboard IPO और 38 SME IPO शामिल थे।
लेकिन सवाल यह है कि जब शेयर बाजार गिर रहा था, तब इतनी बड़ी संख्या में कंपनियां IPO के जरिए बाजार में कैसे आ रही थीं?
और इससे भी महत्वपूर्ण सवाल—क्या ज्यादा IPO आने का मतलब निवेशकों के लिए ज्यादा मुनाफा है?
जवाब है—जरूरी नहीं।
IPO की संख्या, कंपनियों द्वारा जुटाई गई रकम, Listing Gain और लंबी अवधि में मिलने वाला Return चार अलग-अलग बातें हैं।
आइए, Riddhi Siddhi Share Brokers के इस विश्लेषण में SEBI के नए आंकड़ों को आसान भाषा में समझते हैं।
1. SEBI October 2026 Bulletin: सितंबर के प्रमुख आंकड़े
SEBI ने 28 अक्टूबर 2026 को अपनी October Monthly Bulletin जारी की, जिसमें सितंबर 2026 के भारतीय Securities Market की गतिविधियों का विवरण दिया गया।
| प्रमुख आंकड़ा | सितंबर 2026 |
|---|---|
| कुल IPO Listings | 70 |
| Mainboard IPO Listings | 32 |
| SME IPO Listings | 38 |
| Mainboard IPO Fundraising | ₹40,355 करोड़ |
| SME IPO Fundraising | ₹1,684 करोड़ |
| Nifty 50 Monthly Return | −6.1% |
| Sensex Monthly Return | −5.8% |
| Mainboard IPO Fundraising में OFS का हिस्सा | लगभग 75% |
Source: SEBI — Official Reports & Statistics, October 2026 Bulletin. आंकड़ों का विवरण Outlook Money की रिपोर्ट में भी उपलब्ध है।
एक जरूरी अंतर समझें: ₹40,355 करोड़ Mainboard IPO और ₹1,684 करोड़ SME IPO की रकम है। यह पूरे Primary Market में जुटाई गई कुल रकम नहीं है, क्योंकि उसमें Debt, Rights Issues और अन्य Instruments भी शामिल हो सकते हैं।
2. Nifty गिरा, फिर भी 70 IPO कैसे List हुए?
इस सवाल का जवाब समझने के लिए Primary Market और Secondary Market का अंतर जानना जरूरी है।
Primary Market वह बाजार है जहां कंपनियां IPO जैसे माध्यमों से निवेशकों को शेयर जारी करती हैं या मौजूदा शेयरधारक सार्वजनिक निर्गम के जरिए अपने शेयर बेचते हैं।
Secondary Market वह बाजार है जहां पहले से Listed कंपनियों के शेयर NSE और BSE जैसे एक्सचेंजों पर खरीदे और बेचे जाते हैं।
दोनों बाजार आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन इनकी गतिविधियां हमेशा एक जैसी नहीं होतीं।
IPO की तैयारी कई महीने पहले शुरू होती है
कंपनियां IPO लाने के लिए कई महीने पहले तैयारी करती हैं। इसमें Financial Statements, Regulatory Filings, Merchant Bankers, Valuation, Investor Marketing और अन्य प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
इसलिए सितंबर में List हुई कंपनियों के IPO संबंधी फैसले जरूरी नहीं कि सितंबर के बाजार प्रदर्शन को देखकर ही लिए गए हों।
बाजार गिरने का मतलब सभी निवेशकों की रुचि खत्म होना नहीं है
Nifty 50 एक प्रमुख Benchmark Index है, लेकिन इसका प्रदर्शन हर कंपनी या हर IPO की मांग को एक समान नहीं दर्शाता।
कुछ निवेशक कमजोर बाजार में भी नई कंपनियों के Business Model, Growth Prospects और Valuation का मूल्यांकन करके IPO में भाग ले सकते हैं।
हालांकि, कमजोर बाजार में IPO Pricing, Subscription और Listing Performance पर दबाव भी आ सकता है।
Listing की संख्या और निवेशकों का मुनाफा अलग हैं
सितंबर में 70 IPO List होने का मतलब यह नहीं कि सभी 70 IPO ने सकारात्मक Listing Returns दिए।
यह संख्या बाजार में नई Listings की गतिविधि बताती है, निवेशकों की वास्तविक कमाई नहीं।
Riddhi Siddhi Share Brokers का निष्कर्ष: Primary Market में अधिक गतिविधि और Secondary Market में गिरावट एक साथ संभव हैं। केवल IPO की संख्या देखकर बाजार की मजबूती का अनुमान नहीं लगाना चाहिए।
3. Mainboard और SME IPO में क्या अंतर है?
सितंबर के 70 IPO में 32 Mainboard और 38 SME IPO शामिल थे।
लेकिन दोनों श्रेणियों की निवेश संबंधी विशेषताएं अलग हो सकती हैं।
| विशेषता | Mainboard IPO | SME IPO |
|---|---|---|
| कंपनियां | सामान्यतः बड़ी या अधिक स्थापित कंपनियां | छोटी और मध्यम कंपनियां |
| Listing Platform | NSE/BSE Mainboard | NSE Emerge/BSE SME जैसे प्लेटफॉर्म |
| Trading Liquidity | कंपनी के अनुसार अलग | कई मामलों में सीमित |
| Trading Lot | सामान्यतः नियमित शेयर बाजार के अनुरूप | विशेष Lot Size लागू हो सकता है |
| प्रमुख जोखिम | Valuation, Business और Market Risk | इन जोखिमों के अतिरिक्त Liquidity और Exit Risk भी महत्वपूर्ण |
SME IPO में कम Trading Volume, सीमित Buyer Participation और Lot Size की वजह से निवेशकों को शेयर बेचने में कठिनाई हो सकती है।
इसलिए SME IPO को केवल संभावित Listing Gain के आधार पर नहीं देखना चाहिए।
इस विषय पर हमारा पहले प्रकाशित विश्लेषण भी पढ़ें: SME IPO Returns 2026: 21 Multibaggers, But the Median Return Is Just 3.9% — Riddhi Siddhi Share Brokers के IPO education archive में उपलब्ध।
4. ₹40,355 करोड़ के Mainboard IPO में 75% OFS का क्या मतलब है?
SEBI की रिपोर्ट का यह आंकड़ा निवेशकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
सितंबर में Mainboard IPO के जरिए लगभग ₹40,355 करोड़ जुटाए गए। रिपोर्ट के अनुसार इस रकम का करीब 75% हिस्सा Offer for Sale यानी OFS से जुड़ा था।
इसे समझने के लिए पहले Fresh Issue और OFS का अंतर जानें।
Fresh Issue क्या है?
जब कोई कंपनी नए शेयर जारी करके पैसा जुटाती है, तो उसे Fresh Issue कहा जाता है।
इससे प्राप्त रकम कंपनी को मिलती है। कंपनी अपने Offer Documents में बताए गए उद्देश्यों के अनुसार इसका उपयोग कर सकती है, जैसे:
- कारोबार का विस्तार
- कर्ज चुकाना
- नई Manufacturing Capacity
- Technology या Infrastructure Investment
- Working Capital और अन्य घोषित उद्देश्य
OFS क्या है?
Offer for Sale में मौजूदा Shareholders अपने पहले से मौजूद शेयर IPO के माध्यम से बेचते हैं।
इस स्थिति में बिक्री से प्राप्त रकम संबंधित Selling Shareholders को मिलती है, कंपनी को नहीं।
OFS के माध्यम से Promoters, Private Equity Investors या अन्य मौजूदा Shareholders अपनी हिस्सेदारी कम कर सकते हैं।
₹40,355 करोड़ का सरल उदाहरण
रिपोर्ट में बताए गए लगभग 75% OFS अनुपात को ₹40,355 करोड़ पर लागू करें तो:
| हिस्सा | अनुमानित रकम |
|---|---|
| OFS — 75% | ₹30,266 करोड़ |
| Fresh Issue — 25% | ₹10,089 करोड़ |
| कुल | ₹40,355 करोड़ |
ये Rounded Estimates हैं, अलग-अलग कंपनियों की वास्तविक रकम नहीं।
इसका अर्थ है कि Mainboard IPO fundraising का बड़ा हिस्सा मौजूदा शेयरधारकों की बिक्री से संबंधित था, जबकि लगभग एक-चौथाई हिस्सा Fresh Issue से जुड़ा था।
लेकिन क्या ज्यादा OFS होना खराब IPO की निशानी है?
जरूरी नहीं।
OFS एक वैध और सामान्य प्रक्रिया है। कई मजबूत कंपनियों के IPO में भी मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचते हैं।
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि कौन शेयर बेच रहा है, कितनी हिस्सेदारी बेच रहा है, IPO के बाद उसकी कितनी हिस्सेदारी बचेगी और IPO की Valuation कितनी उचित है।
सिर्फ OFS ज्यादा होने से कोई IPO अच्छा या खराब नहीं हो जाता।
5. क्या ज्यादा Subscription का मतलब Listing Gain पक्का है?
किसी IPO के 20 गुना, 50 गुना या 100 गुना Subscribe होने की खबर निवेशकों का ध्यान आकर्षित करती है।
लेकिन Subscription Demand और Listing Return अलग-अलग बातें हैं।
मान लीजिए किसी IPO का Issue Price ₹100 है और वह 50 गुना Subscribe होता है।
Listing के दिन शेयर ₹120 पर खुल सकता है, ₹100 के आसपास रह सकता है या ₹90 पर भी खुल सकता है।
ये केवल समझाने के लिए काल्पनिक उदाहरण हैं।
Listing Price पर कई कारकों का प्रभाव पड़ता है:
- IPO की Valuation
- Institutional और Retail Demand की गुणवत्ता
- Listing के समय बाजार की स्थिति
- कंपनी के Financial Fundamentals
- उपलब्ध शेयरों की Supply और Secondary Market Demand
Oversubscription न तो Allotment की गारंटी है और न ही Listing Gain की।
6. IPO में आवेदन करने से पहले निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
SEBI के नए आंकड़े एक महत्वपूर्ण बात याद दिलाते हैं—IPO में निवेश करने से पहले कंपनी की गुणवत्ता और Issue Structure को समझना जरूरी है।
1. कंपनी का कारोबार
कंपनी क्या बेचती है? उसके ग्राहक कौन हैं? Revenue और Profit का स्रोत क्या है?
2. Financial Performance
पिछले वर्षों में Revenue, Profit, Cash Flow और Debt की स्थिति कैसी रही है?
केवल Revenue Growth देखना पर्याप्त नहीं है। Cash Flow और Profitability भी महत्वपूर्ण हैं।
3. IPO Valuation
कंपनी किस Valuation पर शेयर जारी कर रही है?
जहां उपयुक्त हो, Listed Peers के मुकाबले P/E Ratio, P/B Ratio, Growth और Profitability की तुलना उपयोगी हो सकती है।
4. Fresh Issue और OFS
IPO में कितना पैसा कंपनी को मिलेगा और कितना Selling Shareholders को?
Fresh Issue की रकम किन उद्देश्यों पर खर्च होगी?
5. Promoter और Shareholder Details
IPO के बाद Promoters और अन्य बड़े Shareholders की हिस्सेदारी कितनी रहेगी?
6. Risk Factors
कंपनी के Red Herring Prospectus (RHP) में दिए गए Risk Factors जरूर पढ़ें।
इनमें Customer Concentration, Litigation, Debt, Regulatory Exposure और अन्य Business Risks शामिल हो सकते हैं।
7. Investment Horizon
क्या आपका उद्देश्य केवल Listing Day पर शेयर बेचना है या लंबे समय तक निवेश करना?
दोनों के जोखिम, अपेक्षाएं और मूल्यांकन का तरीका अलग हो सकता है।
IPO आवेदन प्रक्रिया समझने के लिए Riddhi Siddhi Share Brokers की IPO Services देखें।
7. क्या सितंबर के रिकॉर्ड IPO निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हैं?
रिकॉर्ड IPO Listings भारतीय Capital Market में कंपनियों की भागीदारी और सार्वजनिक बाजार तक उनकी पहुंच को दर्शाती हैं।
लेकिन इसे सभी IPO के बेहतर भविष्य या निवेशकों के लिए अधिक Returns का प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
इसके तीन अलग-अलग पहलू हैं।
कंपनियों के लिए: IPO नए निवेशकों तक पहुंच और पूंजी जुटाने या मौजूदा शेयरधारकों को हिस्सेदारी बेचने का अवसर देता है।
बाजार के लिए: नई Listings से निवेश के लिए उपलब्ध कंपनियों और क्षेत्रों की संख्या बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए: ज्यादा विकल्प मिलने के साथ-साथ सही Valuation, Business Quality और Risk Assessment का महत्व भी बढ़ जाता है।
यदि IPO की संख्या तेजी से बढ़ती है लेकिन निवेशक केवल Listing Gains के आकर्षण में बिना उचित जांच के आवेदन करते हैं, तो नुकसान का जोखिम बना रहता है।
इसलिए IPO Activity को Investment Returns का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
8. IPO में निवेश और Assisted Trading के लिए Riddhi Siddhi Share Brokers से जुड़ें
IPO में निवेश शुरू करने के इच्छुक निवेशक Riddhi Siddhi Share Brokers के माध्यम से उपलब्ध IPO Application और Demat/Trading Account सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
जो निवेशक या Working Professionals बाजार के दौरान लगातार Trading Screen नहीं देख पाते, वे हमारे SAMRiddhi — Strategic Account Management with Riddhi Siddhi के अंतर्गत Assisted Trading और Trade Execution Support के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Assisted Trading में पात्र ग्राहकों को उनके अपने Trading Account में लागू Broker Procedures और Authorisations के अनुसार Execution Support उपलब्ध कराया जाता है। यह Discretionary Portfolio Management या Investment Advisory नहीं है।
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9. Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. सितंबर 2026 में भारत में कितने IPO List हुए?
SEBI की October 2026 Bulletin के अनुसार सितंबर में कुल 70 IPO List हुए, जिनमें 32 Mainboard और 38 SME IPO शामिल थे।
Q2. सितंबर 2026 में Nifty कितना गिरा?
Nifty 50 में सितंबर 2026 के दौरान 6.1% की गिरावट दर्ज की गई। इसी अवधि में BSE Sensex लगभग 5.8% नीचे रहा।
Q3. सितंबर में Mainboard IPO से कितनी रकम जुटाई गई?
रिपोर्ट के अनुसार Mainboard IPO के जरिए ₹40,355 करोड़ और SME IPO के जरिए ₹1,684 करोड़ जुटाए गए।
Q4. IPO में 75% OFS का क्या मतलब है?
इसका अर्थ है कि संबंधित IPO fundraising का लगभग 75% हिस्सा मौजूदा शेयरधारकों द्वारा शेयरों की बिक्री से जुड़ा था। यह रकम सीधे Issuing Company को प्राप्त नहीं होती।
Q5. क्या OFS वाला IPO निवेश के लिए खराब होता है?
नहीं। OFS अपने आप में नकारात्मक संकेत नहीं है। निवेशकों को Selling Shareholders, Valuation, Financial Performance और अन्य Risk Factors का मूल्यांकन करना चाहिए।
Q6. क्या ज्यादा IPO आने से Listing Gains बढ़ जाते हैं?
नहीं। IPO Listings की संख्या और Listing Returns के बीच कोई गारंटीकृत संबंध नहीं है। हर IPO का मूल्यांकन अलग से करना जरूरी है।
Q7. IPO में निवेश के लिए Demat Account जरूरी है?
Listed Equity Shares को रखने और Trading के लिए Demat Account आवश्यक होता है। IPO आवेदन के लिए लागू ASBA/UPI प्रक्रियाओं और पात्रता शर्तों का पालन करना होता है।
10. निष्कर्ष: IPO की संख्या नहीं, निवेश की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है
सितंबर 2026 में 70 IPO Listings और Nifty में 6.1% की गिरावट भारतीय बाजार का एक महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने लाती है।
इससे पता चलता है कि Primary Market में गतिविधि और Secondary Market का प्रदर्शन हमेशा एक दिशा में नहीं चलते।
इसके अलावा Mainboard IPO Fundraising में लगभग 75% OFS का हिस्सा यह याद दिलाता है कि हर IPO का उद्देश्य केवल कंपनी के लिए नई पूंजी जुटाना नहीं होता।
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं होना चाहिए कि कितने IPO आ रहे हैं, बल्कि यह होना चाहिए कि जिस IPO में वे निवेश कर रहे हैं, उसका Business, Valuation, Issue Structure और Risk Profile कितना उचित है।
Riddhi Siddhi Share Brokers का उद्देश्य निवेशकों तक स्पष्ट, तथ्य-आधारित Market Education पहुंचाना है, ताकि वे निवेश से जुड़े अवसरों और जोखिमों को बेहतर समझ सकें।
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Sources & References
- SEBI — Reports & Statistics: October 2026 Bulletin — Published 28 October 2026.
- Outlook Money — India’s Primary Market Raises Record ₹1.68 Lakh Crore in September — Published 29 October 2026.
- The Tribune / ANI — Indian Companies Mobilise ₹40,355 Crore Through Mainboard IPOs — Published 29 October 2026.
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Data and observations are based on information available as of 30 October 2026 and may be revised or updated. Investors should independently verify the latest information, review relevant offer documents and consult a SEBI-registered Investment Adviser where appropriate.
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